Monday, 13 January 2014

olitical Sat Sher



बदल रही हैं  फ़िज़ा ,टूट रहे चिलमन  और  झुक रहां हैं  आसमान ,,
              

फिर भी, सहमा हैं बदर , ठहरी हैं बयारें और ,कितने  दमिनियों कि जान।   -Nirbahaya



दो  लब्ज़ों का  ही हैं ये सारा फ़साना


एक  कि माफ़ी ,दूजे का  बरगलाना    -BJP and INC



  बयाँ  क्या  करुँ  अपनी नज़्म का ,

दुआ  लगे   नासूर ज़ख्म सा।    _self



              

शिकवा किससे करें , फरमान ऐ मुरकबा का

मय्यत ख्वाइसो  की  औ अरमान मुजतबा सा   -Dr.ManMohan Singh 

Murqaba-watch;; Mujtaba--the great unifier




दास्ताँ  ऐ बयाँ गैर ,हैं  शुरूर  आज का


नुक्ता चिनी  रब्बा खैर , न हो  फितूर आप  का    -AAP


हुक्म की बयारें हैं तर्रनुम गुनगुनाइए


मुअतला से परेशान हैं फ़ारिग हो आइये   Dr.Visaws




हर ज़ुल्म का एक ही फ़साना हैइंसाफ़ तो बस गाना बजाना है ;;


बदज़बानी का खूबशूरत तराना हैं,आपकी पेचिस में कुछ शायराना हैं   Dr.Viswas