बदल रही हैं फ़िज़ा ,टूट रहे चिलमन और झुक रहां हैं आसमान ,,
फिर भी, सहमा हैं बदर , ठहरी हैं बयारें और ,कितने दमिनियों कि जान। -Nirbahaya
दो लब्ज़ों का ही हैं ये सारा फ़साना
एक कि माफ़ी ,दूजे का बरगलाना -BJP and INC
बयाँ क्या करुँ अपनी नज़्म का ,
दुआ, न लगे नासूर ज़ख्म सा। _self
शिकवा किससे करें , फरमान ऐ मुरकबा का
मय्यत ख्वाइसो की औ अरमान मुजतबा सा -Dr.ManMohan Singh
Murqaba-watch;; Mujtaba--the great unifier
दास्ताँ ऐ बयाँ गैर ,हैं शुरूर आज का
नुक्ता चिनी रब्बा खैर , न हो फितूर आप का -AAP
हुक्म की बयारें हैं तर्रनुम गुनगुनाइए
मुअतला से परेशान हैं फ़ारिग हो आइये Dr.Visaws
हर ज़ुल्म का एक ही फ़साना है, इंसाफ़ तो बस गाना बजाना है ;;
बदज़बानी का खूबशूरत तराना हैं,आपकी पेचिस में कुछ शायराना हैं Dr.Viswas